“शिव संकल्प” का विवरण शुक्ल  यजुर्वेद के छः मंत्रों वाले शिव संकल्प सूक्त में मिलता है। “शिव संकल्प से तात्पर्य शुभ संकल्प श्रेष्ठ एवं कल्याणकारी संकल्प से है। 

 मनुष्य का मन अपूर्व क्षमतावान है। उसमें जो संकल्प जाग जाए उससे उसे विमुख करना बहुत कठिन कार्य है।   इसीलिए वैदिक ऋषि ईश्वर से की गई अपनी प्रार्थनाओं में उन्हें शारीरिक तथा वाचिक ही नहीं अपितु मानसिक पापों से भी दूर रखने की प्रार्थना करते हैं। मन में उठने वाले संकल्प सदैव शुभ व श्रेयस्कर होने चाहिए।

 वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रत्येक व्यक्ति को शिव संकल्प लेने की आवश्यकता है और अपने जीवन के उद्देश्य पर विचार करने की आवश्यकता है । आज प्रतिस्पर्धा की जो होड़ लगी है उसमें हर व्यक्ति आगे निकलना चाहता है और इसी के साथ ईष्या भी जन्म लेती है जबकि प्रतिस्पर्धा भी स्वस्थ   होनी चाहिए और आगे बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्प करके सम्पूर्ण प्रयास करने चाहिए।

 ईश्वर ने हर व्यक्ति को विशिष्ट बनाया है व किसी उद्देश्य के साथ इस धरा पर भेजा है हमें अपने जन्म को सार्थक बनाने का प्रयत्न करना है। किन्हीं भी दो व्यक्तियों की तुलना करना व्यर्थ है , ईश्वर की हर कृति विशिष्ट है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए ।\

आज मनुष्य अपनी कुछ असफलताओं से अवसाद में जा रहा है  तथा नकारात्मकता से घिर रहा है जबकि छोटी -छोटी अनेक सफलताओं की कहीं गिनती ही नहीं है । ऐसे में आवश्यकता है चिंता नहीं बल्कि चिंतन करने की । आवश्यकता है ऐसे शिव संकल्प की जो सकारात्मक सोंच से परिपूर्ण हो तथा मानवता व प्रेम से ओत-प्रोत हो।

हमें असफलताओं के समय धैर्य धारण करने की आवश्यकता है व पुनः पूरी ऊर्जा के साथ शिव संकल्प कर आगे बढ़ने की आवश्यकता है जिससे स्वयं का व जगत का कल्याण हो सके।

“बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय बताती है ” अतः संभावना में हर व्यक्ति में मौजूद हैं , आवश्यकता है तो ईश्वर में आस्था रख सच्चे मन से प्रतिफल की चिंता किए बिना धैर्य के साथ कार्य करने की और तभी हमारा शिव संकल्प पूर्ण होगा।

 निष्कर्ष यह है कि जो मन प्रकर्ष ज्ञान स्वरूप,चित्त स्वरूप और धैर्य रूप है जो अविनाशी मन प्राणियों के भीतर ज्योति रूप में विराजमान है और जिसकी सहायता के बिना कोई कर्म नहीं किया जा सकता उसे कल्याणकारी संकल्प में निहित करने की आवश्यकता है अर्थात मानवता की रक्षा के लिए और जीवन को सार्थक करने के लिए शिव संकल्प आवश्यक है।

 डॉ अर्चना वर्मा

 लखनऊ उ.प्र.

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