अवसाद एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति  उदासी, अकेलापन, निराशा व आत्म प्रताड़ना महसूस करता है। जीवन में रूचि खत्म होने लगती है व किसी एक काम में ध्यान नहीं लगता तथा व्यक्ति अकेला रहना चाहता है। यह स्थिति की मांग के कारण उत्पन्न होने वाला दबाव या तनाव है।

तनाव शारीरिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक या इन सभी का मिला-जुला रूप हो सकता है। कोविड-19 के कारण हुए लाॅकडाउन और बेकारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को गहरा आघात पहुँचाया है। उनमें झुंझलाहट,खीझ, अवसाद और हिंसा बढ़ रही है। लाॅकडाउन से लेकर अभी तक आत्महत्या के बहुत मामले सामने आए हैं और भारी तादाद में लोग अवसाद की चपेट में आ रहे हैं।

कोई कमाई ठप होने से अवसाद में है तो कोई लगातार घर में बंद रहने की वजह से। किसी को भविष्य की चिंता खाए जा रही है तो किसी को कुछ और।यही वजह है कि अस्पतालों के मानसिक रोगी विभाग में ऐसे मरीजों की कतारें दिन पर दिन लम्बी होती जा रही हैं । कुछ लोग कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से भी आत्महत्या कर रहे हैं। देश के दक्षिणी राज्य केरल में तो अधिकतर मौतें कोरोना से नहीं बल्कि मानसिक अवसाद की वजह से हुई हैं।

मनोचिकित्सकों की मानें तो कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लोगों को भीड़ से डर लगने लगा है। अवसाद के चलते जीवन पर भी खतरा बना हुआ है। इन दिनों अवसाद के मुख्य कारण जो सामने आ रहे हैं इस प्रकार हैं– जीविका पर संकट के चलते आर्थिक अभाव। कोरोना महामारी के बीच विपरीत परिस्थितियों में काम करने की उलझन।कुछ पोषक तत्वों की कमी जैसे मैग्नीशियम,आयरन, विटामिन डी,फोलेट,ऐमीनो ऐसिड और जिंक। मेडिकल कारणों में थायराॅइड ग्रंथि का कम सक्रिय होना भी शामिल है।

कुछ दवाओं के साइड-इफेक्ट्स से भी अवसाद हो सकता है इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल में आने वाली दवाएं भी शामिल हैं।-अगर विद्यार्थियों की बात करें तो पढ़ाई में आई रुकावट के चलते अपने भविष्य को लेकर चिंता भी अवसाद का मुख्य कारण है। आर्थिक संकट के बीच बेरोजगारी और लोगों की नौकरियाँ  या काम चले जाना अवसाद की मुख्य वजह बन रहा है।अवसाद ग्रसित व्यक्ति में मुख्य लक्षण निम्न प्रकार हो सकते हैं–कम भूख लगना, अत्यधिक नींद आना या नींद न आना।

किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना।अकेलापन महसूस करना। हर वक्त नकारात्मक सोच रखना। बहुत अधिक क्रोध करना या हमेशा शांत व गुमसुम रहना। जीने की इच्छा न होना। खुशी व गम का अहसास न होना व हीन भावना से ग्रसित रहना।अवसाद से ग्रसित व्यक्ति को व उसके सम्पर्क में जो भी लोग  हों उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए—अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए व उससे बातें कर अवसाद का कारण जानने का प्रयास करना चाहिए।ऐसे व्यक्तियों को खुशनुमा,  हँसी मजाक करने वाले व्यक्तियों व दोस्तों के साथ समय व्यतीत करना चाहिए।

योग व व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए ताकि मस्तिष्क व शरीर में नई ऊर्जा का संचार हो सके। सही समय पर पौष्टिक भोजन करना चाहिए तथा हरे फल व सब्जियों को उसमें शामिल करना चाहिए ताकि हार्मोन का संतुलन बना रहे जो कि अवसाद का एक कारक हैं। नकारात्मक सोंच को हावी नहीं होने देना चाहिए व अपनी रुचि के किसी कार्य में ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करनी चाहिए।किसी भी समस्या को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए बल्कि परिवार के लोगों या मित्रों के साथ विचार-विमर्श कर हल निकालना चाहिए। हाथ में उतना ही काम लें जितना अपनी क्षमता के अनुसार समय पर पूरा कर सकें। अधिक काम से गुणवत्ता भी प्रभावित होती है व स्वयं के लिए समय नहीं मिल पाता है।

रचनात्मक कार्य करें जिससे खुशी  मिले व चिंता से ध्यान हटे।-आशावादी पुस्तकें व महापुरुषों की जीवनियां आदि पढ़नी चाहिए जिससे मानसिक बल प्राप्त हो सके। जगह बदलने से भी सकारात्मक परिणाम मिलते हैं अतः घूमने की योजना भी बनानी चाहिए। आत्महत्या का विचार भी आये तो तुरंत खुली जगह पर जायें व लोगों से बात करें तथा ऐसे समय में अपनी छोटी – बड़ी सभी सफलताओं को याद करना चाहिए व ईश्वर की विशिष्ट कृति यानि स्वयं को धन्यवाद देना चाहिए व इस शरीर को क्षति पहुँचाने का ख्याल  निकाल देना चाहिए।

जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक से भी सम्पर्क करें काउंसलिंग व दवाइयों से भी लाभ मिलेगा। ध्यान रहे ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को विशिष्ट बनाया है अतः स्वयं की तुलना किसी से न करें व कर्म करें। समय से पहले व भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता। इस मनुष्य जीवन का मान रखें व सृष्टि के नेक कार्यों में अपना योगदान कर जीवन सार्थक बनाएं।
 

डॉ अर्चना वर्मा लखनऊ उत्तर प्रदेश

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here